अहम----
विरोध वैमनस्य का कारण है
विषधारी बीज अहम
जब एक समझता है कि
सर्वश्रेष्ठ है वह स्वयं
सामने जो भी है ,जितने भी हैं ,
सभी मूर्ख हैं,
जिन्हे बुद्धि है कम,
वही है ज्ञानवान ,वही है प्रथम,
किन्तु सभी को दिया है ,
मस्तिष्क प्रभु ने ,
करने को विचार तथा,
तर्क शक्ति से विचारों का मंथन
उसके पास भी है एक
कोमल सा अंतर्मन
जो होता है आहत
कठोर वाणी और शब्दों से
अतः आवश्यक होता है थोड़ा सा संयम
लाने में स्वयं में किंचित सा परिवर्तन
जिससे बना रहे परस्पर संयोजन
बना रहे सबका सम्मान
और मधुरता का सम्बन्ध !!
विरोध वैमनस्य का कारण है
विषधारी बीज अहम
जब एक समझता है कि
सर्वश्रेष्ठ है वह स्वयं
सामने जो भी है ,जितने भी हैं ,
सभी मूर्ख हैं,
जिन्हे बुद्धि है कम,
वही है ज्ञानवान ,वही है प्रथम,
किन्तु सभी को दिया है ,
मस्तिष्क प्रभु ने ,
करने को विचार तथा,
तर्क शक्ति से विचारों का मंथन
उसके पास भी है एक
कोमल सा अंतर्मन
जो होता है आहत
कठोर वाणी और शब्दों से
अतः आवश्यक होता है थोड़ा सा संयम
लाने में स्वयं में किंचित सा परिवर्तन
जिससे बना रहे परस्पर संयोजन
बना रहे सबका सम्मान
और मधुरता का सम्बन्ध !!
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें