चरित्र बुद्धि की अपेक्षा अधिक उच्च है —–एमर्सन
वक़्त और सागर की लहरें किसी की प्रतीक्षा नहीं करते —-अंग्रेजी कहावत
स्वभाव की गंभीरता मन की समता संस्कृति के अंतिम पाठों में से एक है और यह समस्त विश्व को वश में करने वाली शक्ति में पूर्ण विश्वास से उत्पन्न होती है —-माडर्न
संसार मुझसे चित्रों में बात करता है मेरी आत्मा संगीत में उत्तर देती है —-रवीन्द्रनाथ
क्या भरोसा जिंदगानी का ,आदमी बुलबुला है पानी का
सबसे बड़ी मुसीबत तब आती है जब हम मुसीबतों का सामना करने की हिम्मत खो बैठते हैं
मुसीबतें हमें आत्मज्ञान कराती हैं और हमें यह दिखती हैं कि हम कौनसी मिटटी के बने हैं
मौन के वृक्ष पर शांति के फल लगते हैं
आगे बढ़ना ही जिंदगी की शान है
ईश्वर का भय ही ज्ञान का उदय हैश्रेष्ठ कौन —–
तप में श्रेष्ठ — ब्रम्हचर्य
कुल में श्रेष्ठ —सुपुत्र
धन में श्रेष्ठ—विद्या
दान में श्रेष्ठ —अभयदान
गुणों में श्रेष्ठ —विनय
महात्माओं में श्रेष्ठ —संयमी
मनुष्यों में श्रेष्ठ —परोपकारी
पाप में श्रेष्ठ —–लोभ
न्याय में श्रेष्ठ —क्षमा
कुल में श्रेष्ठ —सुपुत्र
धन में श्रेष्ठ—विद्या
दान में श्रेष्ठ —अभयदान
गुणों में श्रेष्ठ —विनय
महात्माओं में श्रेष्ठ —संयमी
मनुष्यों में श्रेष्ठ —परोपकारी
पाप में श्रेष्ठ —–लोभ
न्याय में श्रेष्ठ —क्षमा
दुष्ट को उपकार से नहीं अपकार से ही शांत करना चाहिए —कालिदास
फल के आने से पेड़ झुक जाते हैं ,नव वर्षा के समय बादल झुक जाते हैं ,संपत्तिवान होने पर
सज्जन नम्र हो जाते हैं ,परोपकारियों का स्वभाव ऐसा होता है —महात्मा टॉलस्टॉय
कवि वह सपेरा है जिसकी पिटारी में साँपों के स्थान पर हृदय बंद होते हैं
मोह का स्थान मन है —गुलशन नंदा
निराशा में प्रतीक्षा अंधे की लाठी है —प्रेमचंद
नारी के आंसूं एक एक बूँद में एक एक बाढ़ लिए होते हैं —जयशंकर प्रसाद
परिवर्तन ही सृष्टि है स्थिर होना मृत्यु है —मैथिली शरण गुप्त
हृदय की विशालता ही उन्नति की नीव है कठिनाइयां हमें आत्म ज्ञान कराती हैं वे हमें दिखा देती
हैं के हम किस मिटटी के बने हैं —जवाहरलाल नेहरू
संत दूसरों को बचाने के लिए कष्ट सहते हैं ,दुष्ट लोग दूसरों को कष्ट में डालने के लिए —वाल्मीकि
योगी बनो पर रोगी नहीं
स्वस्थ बनो पर मोटे नहीं
बलवान बनो पर दुष्ट नहीं
धीर बनो पर सुस्त नहीं
सरल बनो पर मूर्ख नहीं
सावधान बनो पर वहमी नहीं
उत्साही बनो पर जल्दबाज नहीं
न्यायी बनो पर निर्दयी नहीं
चंगे बनो पर निर्बल नहीं
दृढ बनो पर हठी नहीं
प्रेमी बनो पर पागल नहीं
समालोचक बनो पर निंदक नहीं !
नम्र बनो पर चापलूस नहीं
स्पष्ट बनो पर उद्दंड नहीं
चतुर बनो पर कुटिल नहीं
मितव्ययी बनो पर कंजूस नहीं
गंभीर बनो पर मनहूस नहीं
स्वस्थ बनो पर मोटे नहीं
बलवान बनो पर दुष्ट नहीं
धीर बनो पर सुस्त नहीं
सरल बनो पर मूर्ख नहीं
सावधान बनो पर वहमी नहीं
उत्साही बनो पर जल्दबाज नहीं
न्यायी बनो पर निर्दयी नहीं
चंगे बनो पर निर्बल नहीं
दृढ बनो पर हठी नहीं
प्रेमी बनो पर पागल नहीं
समालोचक बनो पर निंदक नहीं !
नम्र बनो पर चापलूस नहीं
स्पष्ट बनो पर उद्दंड नहीं
चतुर बनो पर कुटिल नहीं
मितव्ययी बनो पर कंजूस नहीं
गंभीर बनो पर मनहूस नहीं
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