वह यूँ दिल से गुज़रते हैं ,कि आहट नहीं होती
वह यूँ आवाज़ देते हैं कि पहचानी नहीं जाती —जिगर
वह यूँ आवाज़ देते हैं कि पहचानी नहीं जाती —जिगर
दिल ले के मुफ्त कहते हैं कुछ काम का नहीं
उलटी शिकायतें हुईं एहसान तो क्या —दाग
उलटी शिकायतें हुईं एहसान तो क्या —दाग
कहानी मेरी रुदादे जहाँ मालूम होती है
जो सुनाता है उसी की दास्ताँ मालूम होती है —सीमाब
जो सुनाता है उसी की दास्ताँ मालूम होती है —सीमाब
यूँ भी तन्हाई में हम दिल को सजा देते हैं
नाम लिखते हैं तेरा लिख के मिटा देते हैं –सईद
नाम लिखते हैं तेरा लिख के मिटा देते हैं –सईद
बादलों में इक बिजली ले रही थी अंगड़ाई
बागबां ने घबरा कर कह दिया बहार आयी —आरज़ू लखनवी
बागबां ने घबरा कर कह दिया बहार आयी —आरज़ू लखनवी
है तरब का अलम से याराना
जिंदगी मौत की सहेली है
तेरी दुनिया तो ए मेरे खालिक
इक पर असरार पहेली है —नरेश कुमार “शाद “—-प्रसन्नता गम की सहेली है ए मेरे ख़ुदा सचमुच तेरी दुनिया रहसयपूर्ण पहेली है
जिंदगी मौत की सहेली है
तेरी दुनिया तो ए मेरे खालिक
इक पर असरार पहेली है —नरेश कुमार “शाद “—-प्रसन्नता गम की सहेली है ए मेरे ख़ुदा सचमुच तेरी दुनिया रहसयपूर्ण पहेली है
आ पड़े हैं मिसले शबनम सैर दुनिया की कर चलें
देख अब ए बागबां अपना चमन हम घर चले —बहादुर शाह ज़फर
देख अब ए बागबां अपना चमन हम घर चले —बहादुर शाह ज़फर
ए अर्श तलाश ए मंज़िल में अंजाम ए दिल की फ़िक्र न कर
गम होना शान ए दिल ठहरी होने दे अगर गुम होता है —अर्श मल्शियनि
गम होना शान ए दिल ठहरी होने दे अगर गुम होता है —अर्श मल्शियनि
हमें पतवार अपने हाथ में लेने पड़े शायद
ये कैसे नाख़ुद हैं जो भंवर तक जा नहीं सकते —क़तील शिफ़ाई
ये कैसे नाख़ुद हैं जो भंवर तक जा नहीं सकते —क़तील शिफ़ाई
अभी न जाओ क़ि तारों का दिल धड़कता है
तमाम रात पड़ी है ज़रा ठहर जाओ —-ज़ेहरा बानो “निगाह”
तमाम रात पड़ी है ज़रा ठहर जाओ —-ज़ेहरा बानो “निगाह”
बहुत दिनों से मैं सुन रहा था
सजा वह देते हैं वह हर खता पर
मुझे तो इसकी सजा मिली है
कि मेरी कोई खता नहीं है —-राज ”
सजा वह देते हैं वह हर खता पर
मुझे तो इसकी सजा मिली है
कि मेरी कोई खता नहीं है —-राज ”
आरज़ूओं की चुभन दिल में घुली जाती है
मेरी सोई हुई रातों को जगाने के लिए —-क़तील शिफ़ाई
मेरी सोई हुई रातों को जगाने के लिए —-क़तील शिफ़ाई
जो हसरतें तेरे गम की कफ़ील है प्यारी
अभी तलाक मेरी तन्हाइयों में बसती हैं —फैज़ अहमद फैज़
अभी तलाक मेरी तन्हाइयों में बसती हैं —फैज़ अहमद फैज़
ये भी मुमकिन नहीं कि मर जाएं
ज़िन्दगी आह कितनी ज़ालिम है —अख्तर अंसारी
ज़िन्दगी आह कितनी ज़ालिम है —अख्तर अंसारी
तारों का गो शुमार में आना मुहाल है
लेकिन किसी को नींद न आये तो क्या करें —अफसर मेरठी
लेकिन किसी को नींद न आये तो क्या करें —अफसर मेरठी
समय की शीला पर
मधुर चित्र कितने
किसी ने बनाए
किसी ने मिटाए
मधुर चित्र कितने
किसी ने बनाए
किसी ने मिटाए
अच्छा है अगर दो आग के दरिया आंसूं बन कर बहते हैं
आँखों में तो रहकर ये कितने तूफ़ान उठाया करते हैं
आँखों में तो रहकर ये कितने तूफ़ान उठाया करते हैं
इश्क ने दिल में जगह की तो कज़ा भी आई
दर्द दुनिया में जब आया तो दवा भी आई—-फनी बदायुनी
दर्द दुनिया में जब आया तो दवा भी आई—-फनी बदायुनी
जिस दिल पै तुझे नाज़ था वह दिल नहीं रहा
ए दोस्तों ! इस इश्क ने बीरान कर दिया
इस दर्दे दिल की मेरे दवा कीजिये ज़रूर
बीमार गम को आके शफा दीजिये ज़रूर
ए दोस्तों ! इस इश्क ने बीरान कर दिया
इस दर्दे दिल की मेरे दवा कीजिये ज़रूर
बीमार गम को आके शफा दीजिये ज़रूर
दिल को दिलदार मिला अब तो यह दिल शाद हुआ
खाना वीरानी थी पहले अब आबाद हुआ
खाना वीरानी थी पहले अब आबाद हुआ
जहाँ ख़ुशी है अलम के नज़ारे रहते हैं
निहाँ नक़ाब में शब के सितारे रहते हैं
निहाँ नक़ाब में शब के सितारे रहते हैं
चलने को चल रहा हूँ पर इसकी खबर नहीं
मैं हूँ सफर में या मेरी मंज़िल सफर में है —शमीम
मैं हूँ सफर में या मेरी मंज़िल सफर में है —शमीम
जल के आशियाँ अपना खाक हो चुका कब का
आज तक ये आलम है रौशनी से डरते हैं —खुमार बाराबंकी
आज तक ये आलम है रौशनी से डरते हैं —खुमार बाराबंकी
ये क्या मंज़िल है बढ़ते हैं न हटते हैं कदम
तक रहा हूँ देर से मंज़िल को मैं मंज़िल मुझे —जिगर मुरादाबादी
तक रहा हूँ देर से मंज़िल को मैं मंज़िल मुझे —जिगर मुरादाबादी
ए निगाहें सहर तू कहाँ खो गई
ज़िन्दगी मौत की सेज़ पर सो गई—अनवर फरहाद
ज़िन्दगी मौत की सेज़ पर सो गई—अनवर फरहाद
यही तारा भी वही बेनूर अर्ज़े खाकी है
जहाँ से मैंने मुहब्बत की इब्तदा की है —युसुफ ज़फर
जहाँ से मैंने मुहब्बत की इब्तदा की है —युसुफ ज़फर
फरार का यह नया रूप है अगर हम लोग
चिराग तोड़ कर नूरे कमर का ज़िक्र करें —अहमद नदीम काज़मी
चिराग तोड़ कर नूरे कमर का ज़िक्र करें —अहमद नदीम काज़मी
कड़ी टूटी कि लड़ी टूटी —जर्मन कहावत
हाले दिल होते हैं हसरत की निगाहों से अयां
मेरी उनकी गुफ्तगू में अब ज़बां खामोश है —आतिश
मेरी उनकी गुफ्तगू में अब ज़बां खामोश है —आतिश
हमसे खिलाफ नाहक सैयदों बागबां हैं
नालों से अपने बिजली किस दिन गिरी चमन पर—आतिश
नालों से अपने बिजली किस दिन गिरी चमन पर—आतिश
तलाशे यार में क्या ढूँढिये किसी का साथ
हमारा साया हमें नागवार राह में है —-आतिश
हमारा साया हमें नागवार राह में है —-आतिश
क़ुफ़्रो इस्लाम की कुछ कैद नहीं ए आतिश
शेख हो या कि बिरहमन हो पर इन्सा होवे
शेख हो या कि बिरहमन हो पर इन्सा होवे
हममे ही न थी कोई बात याद तुमको न आ सके
तुमने भुला दिया हम न तुम्हे भूला सके
तुम ही न सुन सको अगर किस्सा ए गम सुनेगा कौन
किसकी जुबां कहेगी फिर हम न अगर सुना सके
होश में आ चुके थे हम जोश में आ चुके थे हम
बज़्म का रंग देख कर सर न मगर उठा सके —-हफ़ीज़ जालंधरी
तुमने भुला दिया हम न तुम्हे भूला सके
तुम ही न सुन सको अगर किस्सा ए गम सुनेगा कौन
किसकी जुबां कहेगी फिर हम न अगर सुना सके
होश में आ चुके थे हम जोश में आ चुके थे हम
बज़्म का रंग देख कर सर न मगर उठा सके —-हफ़ीज़ जालंधरी
अदा आयी ज़फ़ा आयी गरूर आया हिज़ाब आया
हज़ारों आफतें लेकर हसीनो का शबाब आया
शबे गम किस तरह गुज़री ,शबे गम इस तरह गुज़री
न तुम आये न चैन आया न मौत आई न ख्वाब आया —-नूर नारवी
हज़ारों आफतें लेकर हसीनो का शबाब आया
शबे गम किस तरह गुज़री ,शबे गम इस तरह गुज़री
न तुम आये न चैन आया न मौत आई न ख्वाब आया —-नूर नारवी
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