जो सतही आबें रवां पर निगाह जाती है
हर एक मौज कोई दास्ताँ सुनाती है—-जगन्नाथ आज़ाद
हर एक मौज कोई दास्ताँ सुनाती है—-जगन्नाथ आज़ाद
अपनी निगाहे शोख से छुपिये तो जानिये
महफ़िल में हमसे आप ने पर्दा किया तो क्या —-अर्श मल्शियनि
महफ़िल में हमसे आप ने पर्दा किया तो क्या —-अर्श मल्शियनि
जिस टीस में मज़ा था हमें वो भी अब नहीं
ज़ख्म ए जिगर को आपने अच्छा किया तो क्या—-अर्श मल्शियनि
ज़ख्म ए जिगर को आपने अच्छा किया तो क्या—-अर्श मल्शियनि
तसबीर अजनबी है मगर कुछ तो बात है
हर जाबिये से मेरी तरफ देखती लगे —पवन कुमार “होश”
हर जाबिये से मेरी तरफ देखती लगे —पवन कुमार “होश”
जिंदगी क्या किसी मुफ़लिस की कब है जिसमे
हर घडी दर्द के पैबंद लगे जाते हैं—-फैज़ अहमद फैज़
हर घडी दर्द के पैबंद लगे जाते हैं—-फैज़ अहमद फैज़
कुछ इस कदर है गेम जिंदगी से दिल मायूस
खिज़ा गई तो बहारों में जी नहीं लगता —जिगर मुरादाबादी
खिज़ा गई तो बहारों में जी नहीं लगता —जिगर मुरादाबादी
समझे थे तुझसे दूर निकल जाएंगे कहीं
देखा तो हर मुकाम तेरी रहगुज़र में है —जिगर मुरादाबादी
देखा तो हर मुकाम तेरी रहगुज़र में है —जिगर मुरादाबादी
जैसे वह सुन रहे हैं बैठे हुए मुकाबिल
और दर्द दिल हम अपना उनको सुना रहे हैं —असर लखनवी
और दर्द दिल हम अपना उनको सुना रहे हैं —असर लखनवी
देर तक यूँ तेरी मस्ताना सदायें गूंजी
जिस तरह फूल चमकने लगे वीराने में —साहिर
जिस तरह फूल चमकने लगे वीराने में —साहिर
निगाहों में चमक दिल में ख़ुशी महसूस करता हूँ
कि तेरे बस में अपनी जिंदगी महसूस करता हूँ —क़तील शिफ़ाई
कि तेरे बस में अपनी जिंदगी महसूस करता हूँ —क़तील शिफ़ाई
पूछ मत कैफियत उनकी न पूछ उनका शुमार
चलती फिरती है मेरे सीने में जो परछाइयाँ —फिराख गोरखपुरी
चलती फिरती है मेरे सीने में जो परछाइयाँ —फिराख गोरखपुरी
एक तेरी ही नहीं सूनसान राहें और भी हैं
कल सुबह की इंतज़ारी में निगाहें और भी हैं —धर्मवीर भारती
कल सुबह की इंतज़ारी में निगाहें और भी हैं —धर्मवीर भारती
अनजान तुम बने रहे ये और बात है
ऐसा तो क्या है तुमको हमारी खबर न हो —बेदिल अज़ीमाबादी
ऐसा तो क्या है तुमको हमारी खबर न हो —बेदिल अज़ीमाबादी
यार तक पहुंचा दिया बेताबी ए दिल ने मेरी
इक तड़प में मंज़िलों का फासला जाता रहा
इक तड़प में मंज़िलों का फासला जाता रहा
मेरी हसरत भरी ग़मज़दा रूह में
तेरी आवाज़ का रस उतरने लगा
तेरी आवाज़ का रस उतरने लगा
जो तमन्ना दिल में थी वो दिल में घुट कर रह गयी
उसने पूछा भी नहीं हमने बताया भी नहीं —सिराज़ लखनवी
उसने पूछा भी नहीं हमने बताया भी नहीं —सिराज़ लखनवी
न जाने चुपके से क्या कह दिया बहारों ने
कि दामनो को रफू कर रहे हैं सौदाई —अख्तर प्यामी
कि दामनो को रफू कर रहे हैं सौदाई —अख्तर प्यामी
तुम ख्वाब में भी आये तो मुंह छुपा लिया
देखो जहाँ में परदानशीं और भी तो हैं —दाग
देखो जहाँ में परदानशीं और भी तो हैं —दाग
ए गमे दुनिया तुझे क्या इल्म तेरे वास्ते
किन बहानो से तबियत राह पर लाई गई—साहिर लुधियानवी
किन बहानो से तबियत राह पर लाई गई—साहिर लुधियानवी
याद उनकी है कुछ ऐसी कि बिसरती नहीं
नींद आती भी नहीं रात गुजरती भी नहीं —शहाब जाफरी
नींद आती भी नहीं रात गुजरती भी नहीं —शहाब जाफरी
उनकी मासूम अदाओं पे न जाना ए दिल
सादगी में भी क़यमति का फसूं होता है —आल अहमद” सरबर”
सादगी में भी क़यमति का फसूं होता है —आल अहमद” सरबर”
दिल ही में नहीं रहते आँखों में भी रहते हो
तुम दूर भी रहते हो तो दूर नहीं रहते —फनी बदायुनी
तुम दूर भी रहते हो तो दूर नहीं रहते —फनी बदायुनी
जिन की दूरी में यह लज़्ज़त है कि बेताब है दिल
आ गए वह जो कहीं पास तो फिर क्या होगा —शायर लखनवी
आ गए वह जो कहीं पास तो फिर क्या होगा —शायर लखनवी
लगी चहकने जहाँ भी बुलबुल
हुआ वहीँ पर जमाल पैदा
कमी नहीं है कद्रदां की “अकबर ”
करे तो कोई कमाल पैदा
हुआ वहीँ पर जमाल पैदा
कमी नहीं है कद्रदां की “अकबर ”
करे तो कोई कमाल पैदा
न जाने कौनसी मंज़िल पे आ पहुंचा है प्यार अपना
न हमको ऐतबार अपना न उनको ऐतबार अपना —क़तील शिफ़ाई
न हमको ऐतबार अपना न उनको ऐतबार अपना —क़तील शिफ़ाई
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