मूर्ख मनुष्य भय के पाहिले ही डर जाता है ,कायर भय के समय ही डरता है और साहसी भय के
 बाद डरता है
 —रिशर
मन के सौंदर्य और चरित्र के बल की समानता करने वाली कोई दूसरी वास्तु नहीं है —जे एलन
हम कैसे विश्वास करें कि दूसरे हमारे भेद को गुप्त रखेंगे जबकि हम स्वयं उन्हें गुप्त नहीं रख सकते 
—ला एशोकि
सुन्दर विचार जिसके साथ है वे कभी अकेले नहीं हैं —सर पी सिडनी
स्वतंत्रता नियंत्रित तो हो सकती है किन्तु सीमा बद्ध नहीं
को अति भारः समर्थानां किं दूरं व्यवसायिनाम
को विदेशः सविद्यानां कः परः प्रिय वदिनाम –हितोपदेश
न च विद्या समो बंधुः न च व्याधिसमो रिपुः
न चापत्य समः स्नेही न च धर्मो दया परः
आचरण रहित विचार कितने ही अच्छे क्यों न हों वे झूंठे मोती की तरह हैं —गांधी
सारे संसार को मित्र बनाने का सूत्र वाणी है —अज्ञात
दान में ही प्राप्ति निहित है क्षमा करने से ही हम क्षमा पाने के अधिकारी होते हैं ,आत्मोत्सर्ग ही
 चिरंतन जीवन का मार्ग है —संत फ्रांसिस
मानव के कार्य ही उसके विचारों की सर्वश्रेष्ठ व्याख्या हैं —लाक
हे धीर पुरुष १ आशा तृष्णा और स्वछँदता का त्याग कर ! तू स्वयं ही इन काँटों को मन में रख कर दुखी 
हो रहा है —महावीर
जंगली पशु को पालतू बनाया जा सकता है जंगल की आग भी सब कुछ जल जाने पर अपने आप ख़त्म हो 
सकती है किन्तु लापरवाही से कहे हुए निर्दय शब्द के कुप्रभाव को रोकना कठिन है —रॉबर्टसन
हर रोज जीव मौत के मुंह में जा रहे हैं पर बचे हुए लोग अमर रहना चाहते हैं इससे बढ़ कर आश्चर्य 
क्या होगा 
—महाभारत
आज का दिन हमारा है गुजरे हुए कल के लिए हम मर गए और आने वाले कल के लिए हम अभी पैदा नहीं
 हुए ऐसे जियो जैसे यह आखरी दिन है —बिशप केर
वही आदमी सुखी है जो आज को अपना बना सके जो इत्मीनान के साथ कह सके “ओ कल !
 तेरी ताकत हो 
सो कर ले ! आज मैं जी भर कर जी लिया —ड्राई डन
किसी के छुपे ऐबों का ढिंढोरा मत पीटो क्योंकि उसकी बदनामी करने से तुम भी विश्वास के योग्य 
नहीं रहोगे
 —शेख सादी
तिरस्कार प्रकट करने का सर्वोत्तम उपाय है मौन —बर्नार्ड शॉ
हम हमेशा जीने की तयारी करते रहते हैं जीते कभी नहीं —इमर्सन
जो दूसरों को कठिन प्रतीत होता है उसे आसानी से कर दिखाना कौशल है जो दूसरों को असंभव लगे उसे 
कर दिखाना प्रतिभा है —एमिली
बहस करना बहुत लोगों को आता है बातचीत करना थोड़ों को ही —ओल्कॉट
प्रेम सुनहरी कुंजी है जो दिलों को खोल देती है —ईसा
फूल जो अकेला है उसे काँटों से रश्क की क्या ज़रुरत जो तादाद में बेशुमार है —रवीन्द्रनाथ टैगोर
जीवन का सच्चा पथ यह नहीं है की जो हमें प्राप्त नहीं है उसके लिए हम रोते रहें जीवन का सच्चा पथ यह
 है कि यत्न या योग से जो हमने पा लिया उसे पहचाने उसे अनुकूल बनाये उसमे रस ले और संतोष 
तथा सुख पाये
सबकुछ अधूरा मिला सब कुछ पूरा दूसरा को यह मृग तृष्णा है जीवन का सबसे बड़ा सत्य है अपूर्णता
 मैं तुम वे 
सब अपूर्ण ,अपने में सब अधूरे इस अपूर्णता का समन्वय इस अधूरेपन का सदुपयोग ही जीवन की
 सबसे बड़ी 
कला है
प्रिय क्या है करना और न कहना ,अप्रिय क्या है कहना और न करना —जालीनूस