मेरे बारे में---Nirupama Sinha { M,A.{Psychology}B.Ed.,Very fond of writing and sharing my thoughts

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गुरुवार, 30 नवंबर 2017

Bachapan Ke Din !!

बचपन के दिन !!

शिद्दत से याद आते हैं कभी कभी 
बचपन के दिन 
देखा करते वो जेलरोड की रौनकें 
अलका ज्योति सिनेमा हॉल से फिल्म छूटने पर 
घर को लौटते लोगों का हुजूम ,
कभी गुज़रती बारात ,नाचते गाते लोग 
"कम सप्टेम्बर " की धुन पर नैरो कट पेन्ट और पॉइंटेड शूज 
पहने नौजवानो का ट्विस्ट 
गणेश उत्सव और नवरात्री याने दस दिनों तक 
उत्सव उत्सव होता सारा दिन 
बिन पंखे के सुहाने वो गर्मी के दिन 
{ According to survey Indore was cool that time}
दिन भर कर्नल रंजीत के नॉवेल 
मेजर बलवंत और सोनिया ,सुनील और डोरा 
उनका डॉग क्रोकोडायल 
सुरेंद्रमोहन पाठक और विमल सीरीज 
दस पैसे किराये पर,सिंधी सांई की सारी किताबें पढ़ कर साफ़ 
स्कूल के बाहर ,राजगीरे के लड़डू सेंव की पट्टी 
इमली आंवला कबीठ और हरपा रेवड़ी 
दोस्तों ! ना टीवी था,ना स्मार्ट फ़ोन ,
ना मॉल थे ,ना घूमने फिरने की आज सी आज़ादी 
रेडिओ पर बुधवार को " बिनाका गीतमाला " 
और इतवार को "गीतों भरी कहानी"
फिर भी मस्त थी बचपन की वो ज़िंदगानी !! 

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