हलाहल-------
उच्च वर्ग के दो हैं रूप,
एक दिखाई पड़ता बाहर,
और दूसरा रहस्य की तरह
बना हुआ है गुपचुप गुपचुप।
कैसे कैसे आता है धन,
कैसे बनता वह धनवान,
यह निश्चित है इसके पीछे ,
राह छुपी कोई गुमनाम।
धन संपत्ति है अपार ,
गहनेजेवर की भरमार,
द्वार पे कड़ी कार कतार,
कपड़ों का है एक अम्बार।
रूपया बहता पानी जैसा,
लक्ष्मी जी की माया है,
बुद्धिमान कर्मठ गरीब को,
दूर भागती छाया है।
नेताओं से इनकी यारी,
पुलिस प्रशासन पर ये भारी,
लेनदेन से बनते काम,
खबर न होती कानो कान।-----निरंतर { कंटीन्यू }
उच्च वर्ग के दो हैं रूप,
एक दिखाई पड़ता बाहर,
और दूसरा रहस्य की तरह
बना हुआ है गुपचुप गुपचुप।
कैसे कैसे आता है धन,
कैसे बनता वह धनवान,
यह निश्चित है इसके पीछे ,
राह छुपी कोई गुमनाम।
धन संपत्ति है अपार ,
गहनेजेवर की भरमार,
द्वार पे कड़ी कार कतार,
कपड़ों का है एक अम्बार।
रूपया बहता पानी जैसा,
लक्ष्मी जी की माया है,
बुद्धिमान कर्मठ गरीब को,
दूर भागती छाया है।
नेताओं से इनकी यारी,
पुलिस प्रशासन पर ये भारी,
लेनदेन से बनते काम,
खबर न होती कानो कान।-----निरंतर { कंटीन्यू }
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