हलाहल---------
पति जुटे रहते हैं हरदम,
जोड़ तोड़ में चतुराई मे,
कैसे लाखों बने करोड़ों,
बढ़त बने कमाई में।
पत्नियों की व्यस्तता है,
ताश कभी किटी पार्टियाँ,
ब्यूटी पार्लर में प्रयासरत,
कैसे छुपायें झुर्रियां .
जीने का इनका अजब ढंग,
शायद ही मिल बैठे ये संग,
मर्ज़ी के मालिक ये सारे,
इनका जीवन है स्वच्छन्द ,
किन्तु अचरज की है बात,
इनका मन है अति कठोर,
नहीं पिघलता कितना ही हो,
निर्धन गम से सराबोर।
पति जुटे रहते हैं हरदम,
जोड़ तोड़ में चतुराई मे,
कैसे लाखों बने करोड़ों,
बढ़त बने कमाई में।
पत्नियों की व्यस्तता है,
ताश कभी किटी पार्टियाँ,
ब्यूटी पार्लर में प्रयासरत,
कैसे छुपायें झुर्रियां .
जीने का इनका अजब ढंग,
शायद ही मिल बैठे ये संग,
मर्ज़ी के मालिक ये सारे,
इनका जीवन है स्वच्छन्द ,
किन्तु अचरज की है बात,
इनका मन है अति कठोर,
नहीं पिघलता कितना ही हो,
निर्धन गम से सराबोर।
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