उत्खनन---------
एक तरफ से जगमग जगमग,
अर्थ व्यवस्था के बढ़ाते पग,
दूजी ओर भूखा और नंगा,
भारत के ये दो हैं रूप।
एक तिहाई प्रतिशत ही है बस,
धन से जगमग चकाचौंध,
शेष बचा सारा भारत ही,
कटु,कठोर,सत्य पर गौण।
हर्ष और क्षोभ दोनों साथ,
जैसे साथ हों दिनरात,
हो पारदर्शी और स्वच्छ प्रशासन,
काले कर्मों पर आघात।
प्रगति के आगे बढ़ें कदम,
हो नवप्रकाश का आगमन,
हर दिन हो उजला उजला,
प्रसन्नचित हो हर आनन।
हर भारत का वासी चाहे ,
रोटी,कपडा और मकान,
अपनी योग्यता के अनुरूप,
काम,दाम, और सही मकाम।
----------------------------निरंतर{कंटीन्यू}
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