पतंग-----------------
ऊंचे आसमान पर,
उड़ती पतंग,
लाल,नीली,पीली ,हरी,
कोई सतरंगी पतंग।
हवा से बातें करती,
कभी सितारों को भी छू लेती,
कभी इधर कभी उधर,
लहराती पतंग।
मजबूत डोर से बंधी,
सधे हाथों से बलखाती पतंग,
पेंच लड़ाती ,लिपटती,
कभी घूम जाती पतंग।
कभी कट जाती खुद,
कभी काट देती दूजी पतंग,
काट देती तो खिलखिलाती,
इतराती पतंग।
और जो कट जाती ,
तो लावारिसों की तरह,
कुछ देर इधर उधर,
भटकती पतंग।
कभी किसी पेड़ किसी खम्बे से,
टकराती फट जाती पतंग,
और जो किसी मासूम के हाथ लगती,
तो उसके चहरे पे मुस्कान लाती ,हर्षाती पतंग।
ऊंचे आसमान पर,
उड़ती पतंग,
लाल,नीली,पीली ,हरी,
कोई सतरंगी पतंग।
हवा से बातें करती,
कभी सितारों को भी छू लेती,
कभी इधर कभी उधर,
लहराती पतंग।
मजबूत डोर से बंधी,
सधे हाथों से बलखाती पतंग,
पेंच लड़ाती ,लिपटती,
कभी घूम जाती पतंग।
कभी कट जाती खुद,
कभी काट देती दूजी पतंग,
काट देती तो खिलखिलाती,
इतराती पतंग।
और जो कट जाती ,
तो लावारिसों की तरह,
कुछ देर इधर उधर,
भटकती पतंग।
कभी किसी पेड़ किसी खम्बे से,
टकराती फट जाती पतंग,
और जो किसी मासूम के हाथ लगती,
तो उसके चहरे पे मुस्कान लाती ,हर्षाती पतंग।
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