बेनाम------
यारों हम बेनाम रह गए,
बेनाम से जीते रहे ,बेनाम मर गए,
बहुत किये काम, कभी खाली नहीं रहे,
लेकिन फिर भी बेकाम रह गए,
शराफत के चश्मे से देखा किये दुनिया,
वह निकालती रही काम अपना,
हम नादान रह गए,
सुलगता है दिल,डबडबा जाती हैं आँखें,
खुद पर आता है तरस,
क्यों ज़माने से हम इतने अनजान रह गए,
न समझा हमें कोई,न किसी को समझे हम,
ज़माने भर में खामख्वाह ,बदनाम हो गए!
शब्द अर्थ ----खामख्वाह --बेकार
यारों हम बेनाम रह गए,
बेनाम से जीते रहे ,बेनाम मर गए,
बहुत किये काम, कभी खाली नहीं रहे,
लेकिन फिर भी बेकाम रह गए,
शराफत के चश्मे से देखा किये दुनिया,
वह निकालती रही काम अपना,
हम नादान रह गए,
सुलगता है दिल,डबडबा जाती हैं आँखें,
खुद पर आता है तरस,
क्यों ज़माने से हम इतने अनजान रह गए,
न समझा हमें कोई,न किसी को समझे हम,
ज़माने भर में खामख्वाह ,बदनाम हो गए!
शब्द अर्थ ----खामख्वाह --बेकार
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