बेमानी -------
अक्सर सोचती हूँ मैं ,क्या पीछे छूट गयी हूँ मैं,
या तेज हो गयी है रफ़्तार जिंदगी की,
नहीं बिठा पाई हूँ तालमेल इससे ,
या खुद ही इससे बेमेल हो गयी हूँ मैं,
क्या ऊब गयी है जिंदगी मुझसे ,
या जिंदगी से ऊब गयी हूँ मैं,
मुझे क्यों जिंदगी बेमानी सी लगती है अपनी,
या जिंदगी के लिए बेमानी हो गयी हूँ मैं,
अपने अलावा हर शख्स मुझे,दिखता है कामयाब,
क्या खुद ही एक नाकामयाबी, बन गयी हूँ मैं ,
ढूंढ़ती रही हूँ खुद को, न जाने कहाँ खो गयी हूँ मैं !
शब्द अर्थ---रफ़्तार-गति,बेमानी-निरर्थक
अक्सर सोचती हूँ मैं ,क्या पीछे छूट गयी हूँ मैं,
या तेज हो गयी है रफ़्तार जिंदगी की,
नहीं बिठा पाई हूँ तालमेल इससे ,
या खुद ही इससे बेमेल हो गयी हूँ मैं,
क्या ऊब गयी है जिंदगी मुझसे ,
या जिंदगी से ऊब गयी हूँ मैं,
मुझे क्यों जिंदगी बेमानी सी लगती है अपनी,
या जिंदगी के लिए बेमानी हो गयी हूँ मैं,
अपने अलावा हर शख्स मुझे,दिखता है कामयाब,
क्या खुद ही एक नाकामयाबी, बन गयी हूँ मैं ,
ढूंढ़ती रही हूँ खुद को, न जाने कहाँ खो गयी हूँ मैं !
शब्द अर्थ---रफ़्तार-गति,बेमानी-निरर्थक
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