बेरहम----
ए जिंदगी क्यूँ तुझमे हैं इतने पेंचों ख़म ,
क्यूँ बेचैनियाँ हैं,क्यूँ नहीं है सुकून ओ अमन,
एक मुश्किल सवाल है,कदम दर कदम,
जवाब भी इस सवाल के हैं सख्त बेरहम,
कभी कभी ही बरसती हैं खुशियाँ,
बाकी वक़्त चलता है सहम सहम,
अक्सर तो तू बरपाती है कहर,
कभी ही होती तेरी नवाजिश,तेरा करम,
कुछ लम्हे होते हैं तेरे ,जैसे भीगी हुई शबनम,
बाकी सब हैं शरारे,हैं बर्क ए नशेमन,
जल जाते हैं इसमें आशियाने ,जल जाते हैं चमन,
तुझमे हैं जितनी कशिश,उतनी ही है जलन,
इतनी संगीन क्यूँ हैं हकीकतें तेरी ,
क्यूँ खुशगवार नहीं होता तेरा आलम!
शब्द अर्थ ---पेंचों खम -उलझने ,सुकून ओ अमन-संतोष और शांति ,बेरहम-क्रूर ,
कहर -क्रूर कृत्य ,नवाजिश -कृपा ,बर्क-बिजली,नशेमन -घोंसला ,संगीन-क्रूर,आलम -संसार या वातावरण
ए जिंदगी क्यूँ तुझमे हैं इतने पेंचों ख़म ,
क्यूँ बेचैनियाँ हैं,क्यूँ नहीं है सुकून ओ अमन,
एक मुश्किल सवाल है,कदम दर कदम,
जवाब भी इस सवाल के हैं सख्त बेरहम,
कभी कभी ही बरसती हैं खुशियाँ,
बाकी वक़्त चलता है सहम सहम,
अक्सर तो तू बरपाती है कहर,
कभी ही होती तेरी नवाजिश,तेरा करम,
कुछ लम्हे होते हैं तेरे ,जैसे भीगी हुई शबनम,
बाकी सब हैं शरारे,हैं बर्क ए नशेमन,
जल जाते हैं इसमें आशियाने ,जल जाते हैं चमन,
तुझमे हैं जितनी कशिश,उतनी ही है जलन,
इतनी संगीन क्यूँ हैं हकीकतें तेरी ,
क्यूँ खुशगवार नहीं होता तेरा आलम!
शब्द अर्थ ---पेंचों खम -उलझने ,सुकून ओ अमन-संतोष और शांति ,बेरहम-क्रूर ,
कहर -क्रूर कृत्य ,नवाजिश -कृपा ,बर्क-बिजली,नशेमन -घोंसला ,संगीन-क्रूर,आलम -संसार या वातावरण
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