दिल---
दिल क्यों आवारा सा घूमता रहता है हरदम,
सदियों की दूरियां हों या मीलों के फासले,
तय कर लेता है पल में सफ़र,
क्या क्या बटोर लता है अपने दामन में ,
कभी सारे जहान की बेपनाह खुशियाँ,
कभी ज़माने भर के ज़हरीले खार,
कभी ख़ुशी और कभी गम के आंसूओं में ,
भीग कर लौट आता है हरदम,
कितना नादान कितना मासूम है दिल,
कितना अपना कितना प्यार है दिल!
शब्द अर्थ --ख़ार -कांटे
दलील-------------
माजी कभी मरता नहीं,
दफ्न होता नहीं,
साँसें लेता रहता है,
दिल के किसी कोने में
गर छुपे हैं उसमे गुनाह,
जिन्न की तरह सामने आ ही जाते हैं,
किसी रोज खुद ब खुद ,
कोई दलील काम नहीं आती तब,
जब उजागर हो जाता है सब,
शफ्फाफ नकाबें खुल जातीं हैं ,
और भीतर से निकल आते हैं
बद नुमा ,बदशक्ल और बदनीयत चेहरे!
शब्द अर्थ--दलील-तर्क,शफ्फाफ--सफ़ेद ,माजी-अतीत
दिल क्यों आवारा सा घूमता रहता है हरदम,
सदियों की दूरियां हों या मीलों के फासले,
तय कर लेता है पल में सफ़र,
क्या क्या बटोर लता है अपने दामन में ,
कभी सारे जहान की बेपनाह खुशियाँ,
कभी ज़माने भर के ज़हरीले खार,
कभी ख़ुशी और कभी गम के आंसूओं में ,
भीग कर लौट आता है हरदम,
कितना नादान कितना मासूम है दिल,
कितना अपना कितना प्यार है दिल!
शब्द अर्थ --ख़ार -कांटे
दलील-------------
माजी कभी मरता नहीं,
दफ्न होता नहीं,
साँसें लेता रहता है,
दिल के किसी कोने में
गर छुपे हैं उसमे गुनाह,
जिन्न की तरह सामने आ ही जाते हैं,
किसी रोज खुद ब खुद ,
कोई दलील काम नहीं आती तब,
जब उजागर हो जाता है सब,
शफ्फाफ नकाबें खुल जातीं हैं ,
और भीतर से निकल आते हैं
बद नुमा ,बदशक्ल और बदनीयत चेहरे!
शब्द अर्थ--दलील-तर्क,शफ्फाफ--सफ़ेद ,माजी-अतीत
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