दौर-------
तस्वीरें धुंधलाने लगती हैं,
गड्मड होने लगते हैं चेहरे अक्सर,
जब आँखें हों आंसुओं से डबडबाई ,
या फिर जिंदगी ही ख़त्म होने लगे रिश्तों की ,
कितनी अजीब बात है,
रिश्तों की गहराई और उनका उथलापन,
दोनों हालातों में जिंदगी गुजरती है इस दौर से!
दायरा-----
पानी में पत्थर फेंको तो बनता है दायरा,
जो धीरे धीरे बढ़ता ही जाता है,
और हो जाता है सारे पानी में गुम ,
दुनिया भी है एक बड़ा सा तालाब ,
और इंसान उसमे फेंका हुआ पत्थर,
लेकिन हिसाब ठीक उल्टा होता है,
पहले दायरा सबसे बड़ा होता है,
फिर सिमटता जाता है,
और आखिर मानों ख़त्म ही हो जाता है,
बस पड़ा रहता है इंसान, वहीँ बन कर पत्थर,
जिस्म तो नहीं ,लेकिन दिल की जगह ,उग आता है पत्थर,
जो ख़ुशी से ,गम से ,बेसरोकार होता है !
शब्द अर्थ ----बेसरोकार ---जिसका सम्बन्ध न हो
तस्वीरें धुंधलाने लगती हैं,
गड्मड होने लगते हैं चेहरे अक्सर,
जब आँखें हों आंसुओं से डबडबाई ,
या फिर जिंदगी ही ख़त्म होने लगे रिश्तों की ,
कितनी अजीब बात है,
रिश्तों की गहराई और उनका उथलापन,
दोनों हालातों में जिंदगी गुजरती है इस दौर से!
दायरा-----
पानी में पत्थर फेंको तो बनता है दायरा,
जो धीरे धीरे बढ़ता ही जाता है,
और हो जाता है सारे पानी में गुम ,
दुनिया भी है एक बड़ा सा तालाब ,
और इंसान उसमे फेंका हुआ पत्थर,
लेकिन हिसाब ठीक उल्टा होता है,
पहले दायरा सबसे बड़ा होता है,
फिर सिमटता जाता है,
और आखिर मानों ख़त्म ही हो जाता है,
बस पड़ा रहता है इंसान, वहीँ बन कर पत्थर,
जिस्म तो नहीं ,लेकिन दिल की जगह ,उग आता है पत्थर,
जो ख़ुशी से ,गम से ,बेसरोकार होता है !
शब्द अर्थ ----बेसरोकार ---जिसका सम्बन्ध न हो
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