चेहरा-----
ए दुनिया बनाने वाले ,ए मेरे खुदा ,
तूने बनाया दुनिया में,
हर चेहरा एक दूसरे से जुदा,
तूने बनाई सिर्फ शक्ल ओ सूरत जुदा,
लेकिन बन गयी सबकी ,फितरत जुदा,
इंसानियत गुम होती गई ,
छा गई शैतानी अदा ,
हर शख्स अब तो दिखता है,
दौलत की हवस से बंधा,
हर रिश्ता हर नाता हो गया,
दौलत की हवालात में बंद,
दौलत बन गई ईमां ,
दौलत ही बनी इंतहा ,
तू कहीं नज़र नहीं आया,
दुनिया ने दौलत को ही,
बना दिया है खुदा !
शब्द अर्थ---फितरत-स्वभाव,इंतहा-चरम
ए दुनिया बनाने वाले ,ए मेरे खुदा ,
तूने बनाया दुनिया में,
हर चेहरा एक दूसरे से जुदा,
तूने बनाई सिर्फ शक्ल ओ सूरत जुदा,
लेकिन बन गयी सबकी ,फितरत जुदा,
इंसानियत गुम होती गई ,
छा गई शैतानी अदा ,
हर शख्स अब तो दिखता है,
दौलत की हवस से बंधा,
हर रिश्ता हर नाता हो गया,
दौलत की हवालात में बंद,
दौलत बन गई ईमां ,
दौलत ही बनी इंतहा ,
तू कहीं नज़र नहीं आया,
दुनिया ने दौलत को ही,
बना दिया है खुदा !
शब्द अर्थ---फितरत-स्वभाव,इंतहा-चरम
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें