स्मृति---
माँ तुम्हे ढूंढ लिया है ,मैंने हर जगह
पेड़ों पत्तों फूलों में ,गुलशन में गुलजारो में
तुम्हे देख लेने के पक्के यकीन के साथ
हवाई जहाज़ की खिड़की से गुज़रते बादलों में
हम सभी भगवान को कहते हैं" ऊपरवाला "
जाने कहाँ है उसका घर,सात आसमानो में
ले जाता है जिन्हे ऊपर ,वो बस रह जाते हैं दास्तानों में
कमाल का जादूगर है वो ,
लोगों को भेजना और बुलाना ,"नेपथ्य"से
मानो "रंगमंच" है दुनिया ,और हर एक का "शो"है तीन घंटे का
कर लो जो भी "अच्छा-बुरा" करना है तीन घंटे में
पर्दा उठने से पहले ,पर्दा गिरने के बाद ?
क्यों ? कैसे ? किसलिए ?
इंसान घिरा रहता है इन "सवालों "में !!
माँ तुम्हे ढूंढ लिया है ,मैंने हर जगह
पेड़ों पत्तों फूलों में ,गुलशन में गुलजारो में
तुम्हे देख लेने के पक्के यकीन के साथ
हवाई जहाज़ की खिड़की से गुज़रते बादलों में
हम सभी भगवान को कहते हैं" ऊपरवाला "
जाने कहाँ है उसका घर,सात आसमानो में
ले जाता है जिन्हे ऊपर ,वो बस रह जाते हैं दास्तानों में
कमाल का जादूगर है वो ,
लोगों को भेजना और बुलाना ,"नेपथ्य"से
मानो "रंगमंच" है दुनिया ,और हर एक का "शो"है तीन घंटे का
कर लो जो भी "अच्छा-बुरा" करना है तीन घंटे में
पर्दा उठने से पहले ,पर्दा गिरने के बाद ?
क्यों ? कैसे ? किसलिए ?
इंसान घिरा रहता है इन "सवालों "में !!
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