हम अत्याचार सहन कर सकते हैं पर उसे भूल नहीं सकते –जवाहरलाल नेहरू
लानत है उस शख्स पर जो पहलीबार मुझे धोखा देता है और लानत है मुझ पर अगर मैं दूसरी बार धोखा
खाता हूँ —अज्ञात
सद्बुद्धि आने पर बुरा समय बीतते देर नहीं लगती है
जिसने किसी ऐसे आदमी पर अत्याचार किया है जिसका ईश्वर के सिवा और कोई सहायक ही नहीं है तो
उसे चाहिए कि सचेत रहे और अपने अत्याचार का फल शीघ्र न पाने से भ्रम में न पड़ जाए—इस्माइल –
इब्न – अबूबकर
तत्व —पृथ्वी ,जल ,अग्नि ,वायु। आकाश
तत्व गुण–रस,गंध ,रूप ,स्पर्श ,शब्द
ज्ञानेन्द्रिय –नासिका,रसना,आँख ,त्वचा ,कान
कर्मेन्द्रिय —गुदा ,लिंग ,पैर ,हाथ ,जीभ
तत्व गुण–रस,गंध ,रूप ,स्पर्श ,शब्द
ज्ञानेन्द्रिय –नासिका,रसना,आँख ,त्वचा ,कान
कर्मेन्द्रिय —गुदा ,लिंग ,पैर ,हाथ ,जीभ
आपत्तियों की एक लम्बी सेना को अपने खिलाफ खड़ा देख कर भी जिसका मन बैठ नहीं जाता बाधाओं
को उसके पास आने में खुद बढ़ा होती है —तिरुवल्लुवर
दया पात्र होने से ईर्ष्या पात्र होना अच्छा है —सूक्ति
समझ में न आने वाली भाषा बिना रौशनी की लालटेन है —सूक्ति
गरीब वह नहीं है जिसके पास काम है बल्कि वह है जो अधिक चाहता है —डेनियल
निर्बल वह नहीं है जिसे निर्बल कहा जाता है ,बल्कि जो अपने को निर्बल समझता है –गांधी
बुद्धि का पहला लक्षण है काम का आरम्भ न करो और अगर काम शुरू करो तो उसे पूरा कर के छोडो
–विनोबा
कृतज्ञता का माप किये हुए उपकार से नहीं उपकृत व्यक्ति की शराफत से होता है —तिरुवल्लुवर
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