कोई मुश्किल नहीं किस्मत का बदल जाना भी
दामन पीर किसी दिन मेरे हाथ आ जाये
दामन पीर किसी दिन मेरे हाथ आ जाये
नाज़ुक कमर लचक गयी बालों के भार से
सीना पसीना हो गया फूलों के हार से
सीना पसीना हो गया फूलों के हार से
वसीयत मीर ने मुझको यही की
कि सबकुछ होना तू आशिक ना होना !
कि सबकुछ होना तू आशिक ना होना !
तस्बीह बकफ़ फिरने से क्या काम चले
मनके की तरह दिल न फ़िर जब तक मीर
मनके की तरह दिल न फ़िर जब तक मीर
है बहार का ये आलम के हर एक गुल परेशां
तो फिर उनका पूछना क्या जो है ख़िज़ां के मारे
तो फिर उनका पूछना क्या जो है ख़िज़ां के मारे
वह करे हज़ार पर्दा वह बचाये लाख दामन
है नज़र अगर सलामत तो हज़ारहा नज़ारे
है नज़र अगर सलामत तो हज़ारहा नज़ारे
फलक ए काश हमको
खाक ही रखता कि इसमें हम
गुबारे राह होते या
किसी के खाके -पा होते —-मीर
खाक ही रखता कि इसमें हम
गुबारे राह होते या
किसी के खाके -पा होते —-मीर
मैं जब भी उनके ख्यालों में
खो सा जाता हूँ
वह खुद भी बात करें तो
बुरा लगे है मुझे —-अख्तर
खो सा जाता हूँ
वह खुद भी बात करें तो
बुरा लगे है मुझे —-अख्तर
मैं हूँ पतंग,कागजी ,डोर है उसके हाथ में
चाहा इधर घटा दिया चाह उधर बढ़ा दिया –नज़ीर अकबराबादी
चाहा इधर घटा दिया चाह उधर बढ़ा दिया –नज़ीर अकबराबादी
यह गुंचा जो बेदर्द गुलची ने तोडा
खुदा जाने किसका यह नक़्शे दहन था !
खुदा जाने किसका यह नक़्शे दहन था !
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