किस कदर ए जिंदगी ! ना आशना जाता हूँ मैं ,
किस लिए आया था आखिर क्यों चला जाता हूँ मैं !

थके जो पाँव तो चल सर के बल न ठहर आतिश
गीले मुराद है मंज़िल में ,खार राह में हैं !

बेजान बोलता है मसीहा के हाथ में !

किसी के आते ही साकी के ऐसे होश उड़े ,
शराब सींख में डाली कबाब शीशे में !

न हाथ थाम सके न पकड़ सके दामन ,
बड़े करीब से उठ कर चला गया कोई

सबब हर एक मुझसे पूछता है मेरे रोने का
इलाही सारी दुनिया को मैं कैसे राजदां कर लूं

आगाज़ तो अच्छा है , अंजाम खुद जाने !

मस्जिदे हस्त ,अंदरुने  औलिया
सिज़दा गाहे जुम्ला हस्त आंजा खुदा ——-ईश्वर का निवास संतों के अंदर है जिन्हे दंडवत प्रणाम व दर्शन की लालसा हो वह वहाँ जाके उसे ढूंढे

हर कि ख्वाहिद हम नशीनी व खुदा
गो नशीं अंदर हुज़ूरे औलियायदि तुम्हे ईश्वर से समीपत्व की इच्छा है तो संतों के हृदय में घुसने पर ही वह तुम्हे मिलेगी

हम नशीनी साअते वा औलिया
बिहतर अज सद साला ताअत बेरिया
संतों का सत्संग महान है ,वहां का एक घडी बैठना सौ वर्षों की कठिन तपस्या से भी बढ़ कर फल देने वाला है

मरद हज्जे हम रहे हाजी तालाब
ख्वाह हिन्दू ,ख्वाह तुर्को या अरब
मनुष्य यदि ईश्वर के दर्शन की चाहना रखता हो तो जो लोग वहां पहुँच चुके हैं उनसे पूछो वे चाहे हिन्दू हों या मुसलमान,तुर्क हों या अरब

शेख अफ्गानस्तो बे आलत चूं हक़
बा मुरीदा दाद बे गुत्फन सबक
ऐसे गुरुओं की पहचान यह है कि वह दूर रहते हुए भी अपने शिष्यों की अनुभव की ताकत से देखभाल करते हैं

गर महकयाबी मिया तू जान ख्वेश
वर्ना दानी रह मर्द तनहा तो पेश
अगर ऐसी खुशबू तुमको कहीं मिले तो समझ लेना इसीसे मेरा भला होगा। अगर ऐसा न देखो तो उससे अलग रहो दिखावे में पड़ के गुरु मत बना लो

दस्त पीर अज गाय वां कोताह नेस्त
दस्त ओ जुजम कुदरती अल्लाह नेस्त
गुरु चाहे दूर हो पर उसके हाथ को तू छोटा मत समझ ईश्वर की महान शक्तियों में से एक अंश उसके अंदर भी है वह इतना विस्तृत है कि सातवें आसमान तक तेरी सहायता करेगा

मर्दरा दस्ते दराज आमद यकी
वर गुजिस्त अज आसमाने हफ्तमी
यदि तू अपनी इन्द्रियों का दमन करना चाहता है और अपने नफ़्स पर अधिकार करना चाहता है तो किसी महा पुरुष की छत्र छाया में आ जा

हेच न कुशाद नफ़्सरा जज ज़िल्ले पीर
दामने आ नफ़्स कुशरा सख्त गीर
और उसका दामन मजबूती से पकड़ ले

गर वगीरी सख्त आं तौफीक होस्त
हर की कुव्वत दर तो आयद जज़ब औसत
यदि तूने ऐसा कर लिया तो तेरे अंदर के सारे परदे खुल जाएंगे तुझ में योग्यता आ जाएगी और उसकी सारी शक्तियां स्वयं तुझमे प्रवेश कर जाएंगी

आप जब दिल के पास रहते हैं
जाने क्यों हम उदास रहते हैं

बेचैन है निगाह तो दिल बेकरार है
ए आमदे बहार तेरा इंतज़ार है

तुम मुखातिब भी हो करीब भी हो
तुमको देखें के तुमसे बात करें

एक फकत है सादगी तिस पै बला ए जां है तू
ईश्वा करिश्मे कुछ नहीं आन नहीं अदा नहीं —-मीर

काबे सौ बार वो गया तो क्या
जिसने यां एक दिल में राह न की —मीर

ग़ज़ल —–

ये किस मकाम पे उल्फत ने मुझको छोड़ दिया
के मेरे नाम से दीवानगी को जोड़ दिया
है जिंदगी की कहानी तो सिर्फ इतनी सी
जहाँ भी चाहा हवा दि ने रुख को मोड़ दिया
वफ़ा के नाम पर दुनिया को लूटने वालों
ये क्या गज़ब है के दामन वफ़ा का छोड़ दिया
हमारा क्या है हमारे बनो —बनो न बनो
अब हमने आपही फ़ुर्क़त से रिश्ता जोड़ दिया
जुनूने इश्क की तासीर अल अमां “आतिश”
के खुद ही कश्ती को तूफां  में लाके छोड़ दिया !—आतिश बलन्द शहरी

याद आ गयी किसी की काट गयी जिंदगी की रात
वरना कहाँ सुबह थी ऐसी शबे दराज़ में !