खामोश लब हैं दर्दे मोहब्बत जिगर में है
सदियों का इंतज़ार मेरी इक नज़र में है
सदियों का इंतज़ार मेरी इक नज़र में है
कई बार डूबे कई बार उबरे
कई बार साहिल से टकरा के आये
तलाशो तालाब में वो लज़्ज़त मिली है
दुआ कर रहा हूँ कि मंज़िल न आये
कई बार साहिल से टकरा के आये
तलाशो तालाब में वो लज़्ज़त मिली है
दुआ कर रहा हूँ कि मंज़िल न आये
जोशी जूनून में एक से हैं दोनों
क्या गरदे सेहरा क्या खाके मंज़िल
दिल और वह भी टूटा हुआ दिल
अब जिंदगी है जीने के काबिल
क्या गरदे सेहरा क्या खाके मंज़िल
दिल और वह भी टूटा हुआ दिल
अब जिंदगी है जीने के काबिल
कहते हैं लोग मौत से बदतर है इंतज़ार
मेरी तमाम उम्र कटी इंतज़ार में —मजाज़
मेरी तमाम उम्र कटी इंतज़ार में —मजाज़
सूफियों की उपासना —-
जिसे इश्क का तीर कारी लगे
उसे जिंदगी जग में भारी लगे
न छोड़े मोहब्बत दमे मर्ग तक
जिसे यार जानीसू यारी लगे
न होवे उसे जग में हरगिज़ करार
जिसे इश्क की बेकरारी लगे
हर इक वक़्त मुझ आशिके ज़ार कूं
पियारे तेरी बात प्यारी लगे
वाली कूं कहे तू अगर एक वचन
रकीबों के दिल में कटारी लगे !
जिसे इश्क का तीर कारी लगे
उसे जिंदगी जग में भारी लगे
न छोड़े मोहब्बत दमे मर्ग तक
जिसे यार जानीसू यारी लगे
न होवे उसे जग में हरगिज़ करार
जिसे इश्क की बेकरारी लगे
हर इक वक़्त मुझ आशिके ज़ार कूं
पियारे तेरी बात प्यारी लगे
वाली कूं कहे तू अगर एक वचन
रकीबों के दिल में कटारी लगे !
आशिक़ को इम्तियाजे दैरो काबा कुछ नहीं
उसका नक़्शे पा जहाँ देखा वहीँ सर रख दिया
उसका नक़्शे पा जहाँ देखा वहीँ सर रख दिया
अगर इश्क न होता इंतेज़ाम आल में सूरत न पकड़ता
इश्क के बगैर जिंदगी बवाल है
इश्क को दिल दे देना कमाल है
इश्क बनाता है इश्क जलाता है
दुनिया में जो कुछ है इश्क का जलवा है
आग इश्क की गर्मी है
हवा इश्क की बेचैनी है
पानी इश्क की रफ़्तार है
खाक इश्क का कयाम है
मौत इश्क की बेहोशी है
जिंदगी इश्क की होशियारी है
रात इश्क की नींद है
दिन इश्क का जागना है
नेकी इश्क की कुर्बत है
गुनाह इश्क से दूरी है
बिहिश्त इश्क का शौक है
दोजख इश्क का जौंक है
इश्क के बगैर जिंदगी बवाल है
इश्क को दिल दे देना कमाल है
इश्क बनाता है इश्क जलाता है
दुनिया में जो कुछ है इश्क का जलवा है
आग इश्क की गर्मी है
हवा इश्क की बेचैनी है
पानी इश्क की रफ़्तार है
खाक इश्क का कयाम है
मौत इश्क की बेहोशी है
जिंदगी इश्क की होशियारी है
रात इश्क की नींद है
दिन इश्क का जागना है
नेकी इश्क की कुर्बत है
गुनाह इश्क से दूरी है
बिहिश्त इश्क का शौक है
दोजख इश्क का जौंक है
हमी सोज़ हमी साज़ ओ हमी नगमा
ज़रा सम्हाल के सरे बज़्म छेड़ना हमको
न लुत्फ़ जीस्त का हासिल न मौत की तल्खी
खबर नहीं गेम उल्फत ने क्या दिया हमको —जज़्बी
ज़रा सम्हाल के सरे बज़्म छेड़ना हमको
न लुत्फ़ जीस्त का हासिल न मौत की तल्खी
खबर नहीं गेम उल्फत ने क्या दिया हमको —जज़्बी
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