उत्खनन-------
नाथू राम गोडसे था हंता ,
मुख्य नहीं मात्र था मोहरा,
आया समक्ष किया प्रणाम,
ले लिए उसने गाँधी के प्राण।
देश के लिए उनका जीवन,
देश के लिए किये सब कर्म,
देश भक्ति सेवा निष्काम,
किया आचरण और दिया ज्ञान।
30 जनवरी और 2 अक्टूबर ,
आते हैं प्रति वर्ष समय पर,
प्रगट सदा करते हैं व्यक्ति,
क्रमशः विषाद हर्ष अभिव्यक्ति।
उस दिन बंद मांस की बिक्री,
और होता है मद्य निषेध,
किन्तु काले बाजार से लेकर ,
रोशन होते हैं अवकाश।
श्रद्धांजली का यह रूप?
थोडा भजन और पुष्प,
शाम को तोड़ें मद्य निषेध,
भूल अहिंसा खाएं मुर्ग।
कहते सब अहिंसा है मिथ्या,
गाँधी हो गए कालातीत,
प्रासंगिक नहीं हैं अब वे,
उनकी शिक्षा उनकी नीट।
जब जब विश्व में कोई भी,
देश बनाया गया परतंत्र,
इसके पीछे इतिहास संस्कृति,
नष्ट करने के थे षड्यंत्र।
वैसे तो मानव इतिहास में,
कई युद्ध हुए महायुद्ध हुए,
छिट पुट से आतंकवाद ने,
नाक में कर दल है दम।
आतंक वाद ने लील लिए हैं,
कई मासूम कई निर्दोष,
पिता ,पति,बेटे और भाई,
सो गए म्रत्यु की आगोश।
वर्षों से हम झेल रहे हैं,
उजड़ों का दुःख देख रहे हैं,
रक्त बीज से बढ़ते दिखाते,
दानव ये मन चीर रहे हैं।
भारत और पाक के बीच,
विवादित सा बसा कश्मीर,
बनाया गया इसे अटूट,
समझौता था संवैधानिक।
जीसस अल्ला या भगवान ,
सब हैं एक अलग हैं नाम,
इबादत पूजा अलग भले ही,
एक ही है वह दयानिधान।
जिस देश की धरती पावन,
पर्वत पावन,नदियाँ पावन,
सब धर्मों की शिक्षा पावन,
वातावरण क्यों हुआ अपावन?
पापी से नहीं पाप से घ्रणा ,
गाँधी जी ने यह बात कही,
दोनों एकरूप हो जाएँ तो,
कैसे होगा न्याय सही।
सभी देशों से अच्छे रिश्ते,
मधुर सम्बन्ध हैं मित्रवत,
किन्तु देश कुछ ऐसे भी हैं,
बने हैं अब भी यथावत।
निरंतर----{कंटीन्यू}
नाथू राम गोडसे था हंता ,
मुख्य नहीं मात्र था मोहरा,
आया समक्ष किया प्रणाम,
ले लिए उसने गाँधी के प्राण।
देश के लिए उनका जीवन,
देश के लिए किये सब कर्म,
देश भक्ति सेवा निष्काम,
किया आचरण और दिया ज्ञान।
30 जनवरी और 2 अक्टूबर ,
आते हैं प्रति वर्ष समय पर,
प्रगट सदा करते हैं व्यक्ति,
क्रमशः विषाद हर्ष अभिव्यक्ति।
उस दिन बंद मांस की बिक्री,
और होता है मद्य निषेध,
किन्तु काले बाजार से लेकर ,
रोशन होते हैं अवकाश।
श्रद्धांजली का यह रूप?
थोडा भजन और पुष्प,
शाम को तोड़ें मद्य निषेध,
भूल अहिंसा खाएं मुर्ग।
कहते सब अहिंसा है मिथ्या,
गाँधी हो गए कालातीत,
प्रासंगिक नहीं हैं अब वे,
उनकी शिक्षा उनकी नीट।
जब जब विश्व में कोई भी,
देश बनाया गया परतंत्र,
इसके पीछे इतिहास संस्कृति,
नष्ट करने के थे षड्यंत्र।
वैसे तो मानव इतिहास में,
कई युद्ध हुए महायुद्ध हुए,
छिट पुट से आतंकवाद ने,
नाक में कर दल है दम।
आतंक वाद ने लील लिए हैं,
कई मासूम कई निर्दोष,
पिता ,पति,बेटे और भाई,
सो गए म्रत्यु की आगोश।
वर्षों से हम झेल रहे हैं,
उजड़ों का दुःख देख रहे हैं,
रक्त बीज से बढ़ते दिखाते,
दानव ये मन चीर रहे हैं।
भारत और पाक के बीच,
विवादित सा बसा कश्मीर,
बनाया गया इसे अटूट,
समझौता था संवैधानिक।
जीसस अल्ला या भगवान ,
सब हैं एक अलग हैं नाम,
इबादत पूजा अलग भले ही,
एक ही है वह दयानिधान।
जिस देश की धरती पावन,
पर्वत पावन,नदियाँ पावन,
सब धर्मों की शिक्षा पावन,
वातावरण क्यों हुआ अपावन?
पापी से नहीं पाप से घ्रणा ,
गाँधी जी ने यह बात कही,
दोनों एकरूप हो जाएँ तो,
कैसे होगा न्याय सही।
सभी देशों से अच्छे रिश्ते,
मधुर सम्बन्ध हैं मित्रवत,
किन्तु देश कुछ ऐसे भी हैं,
बने हैं अब भी यथावत।
निरंतर----{कंटीन्यू}
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